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रेल विभाग के प्रश्नपत्र में दिखीं हिंदी की भारी गलतियां, परीक्षार्थी ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

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हाल ही में उत्तर रेलवे के द्वारा कराई गई एक विभागीय परीक्षा में पूछे गए सवालों का हिंदी अनुवाद आपको हैरान कर देगा। 24 दिसंबर 2016 को उत्तर रेलवे के विद्युत विभाग द्वारा ग्रुप बी में असिस्टेंट इलेक्ट्रिकल इंजिनियर के पदों पर पदोन्नति के लिए कराई गई 30% सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा में न सिर्फ सरकारी नियमों का उल्लंघन किया गया बल्कि उस प्रश्नपत्र को देखकर राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे सरकारी दावों पर भी सवाल खड़ा होता है।

जब नवभारत टाइम्स को प्राप्त हुए रेलवे के प्रश्नपत्र की जांच की गई तो उसमें कई खामियां नजर आईं। खामियों का यह सिलसिला प्रश्नपत्र के पहले प्रश्न से ही शुरू हो जाता है। रेल मंत्रालय की गाइडलाइन्स के मुताबिक, ऐसे प्रश्नपत्रों में व्यवसायिक क्षमता की जांच करने के लिए कुल 150 अंकों में से 15 अंक राजभाषा नीति और राजभाषा नियमों पर आधारित प्रश्नों के लिए अलग रखने चाहिए। लेकिन इस प्रश्नपत्र में राजभाषा से जुड़ा मात्र एक प्रश्न था जो कि 14 अंक का था। हालांकि यहां मामला सिर्फ एक अंक का है लेकिन साथ ही सवाल यह भी है कि क्या एक अंक की कमी के चलते नियमों के उल्लंघन को अनदेखा कर देना चाहिए?

पेपर वन का 1.2.4 प्रश्न था 'Speaker of Lok Sabha', जबकि इसका हिंदी अनुवाद में लिखा गया था कि 'लोकसभा के वक्ता का नाम बताएं।' इसके अलावा इसी प्रश्नपत्र के 2.1 प्रश्न में 'demonetisation' का हिंदी अनुवाद 'मुद्राकरण' लिखा गया था। प्रश्नपत्र के 3.3 प्रश्न में अंग्रेजी में लिखा था, 'Who is the Electrical Inspector to Govt. Of India in Indian Railways and what is his role as per I.E. Rules?' जबकि इसके हिंदी अनुवाद में लिखा था, 'भारतीय रेल में भारतीय विद्युत अधिनियम के अनुसार इलेक्ट्रिकल इंजिनियर कौन होता है? इसके अनुपाल हेतु इनका क्या दायित्व है?' अंग्रेजी में इस प्रश्न को पढ़ने पर पता लगता है कि परीक्षार्थी को रेलवे के वर्तमान इलेक्ट्रिकल इंजिनियर का नाम और आई.ई. नियमों के तहत उसके काम को लिखना है। लेकिन हिंदी अनुवाद में अर्थ और ही निकल रहा है। इसके अलावा हम आपको बता दें कि इंडियन इलेक्ट्रिसिटी रूल्स और भारतीय विद्युत अधिनियम में भी बुनियादी अंतर होता है।

Courtesy: Indiatimes

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